Wednesday, February 11, 2015

दिल्ली चुनाव

आज बहुत दिनो के बाद आख़िरकार मैं कुछ लिखने के लिए बाध्य हो गया हूँ. दिल्ली के विधानसभा चुनाव के परिणाम ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है. ये क्या है....प्रचंड बहुमत...या कोई चमत्कार...या फिर जनता का अपार स्नेह और प्यार और आशीर्वाद अरविंद केजरीवाल के लिए. इस परिणाम से अरविंद एक नायक के रूप मे भारत के राजनीतिक पटल पर उभर कर सामने आए हैं.... उन्होने ये साबित कर दिया है कि अगर इरादे नेक हों और कार्य संस्कृति में बदलाव लाने की तीव्र इच्छा शक्ति हो तो लोक्तन्त्र में जनता को अपने साथ लेकर चलने में कोई परेशानी नहीं है. आख़िर जनता क्या चाहती है... एक साधारण जिंदगी जहाँ उसे शासन के तरफ से किसी प्रकार के अत्याचार का सामना ना करना परे और वह एक साफ़ सुथरे माहौल में स्वस्थ और सुरक्षित जीवन यापन कर सके... जहाँ उसे भरोसा हो की ईमानदारी करने पर प्रतारित नहीं किया जाएगा और बेईमानी करने पर बख़्शा नहीं जाएगा. और जब ऐसा सपना और इरादा लेकर कोई सामने आता है तो जनता को उस में अपना नायक दिखता है, अपना नेता दिखता है और जनता उसे अपने सिर माथे पर बिठा लेती है...और कुछ ऐसा ही आज हुआ है...एक नया इतिहास रचा गया है...उम्मीदों के नये सूरज का उदय हुआ है...नये लोगों के लिए भी भारत की राजनीति में आने का एक नया और अनोखा मार्ग प्रशस्त हुआ है... और लगता है कि अब वो दिन दूर नहीं जब देश की जनता अपने भाग्य का फ़ैसला करने के लिए खुद भी चुनाव के मैदान में जाने से नहीं हिचकिचाएगी.... सर्वे भवंतु सुखिन: ......जय हिंद !